प्रबंधित परियोजनाएं


प्रबंधित परियोजनाएं

जलगाँव दूध संघ

वर्ष 2014-15 के दौरान दूध संघ ने 822 सहकरी समितियों के माध्यम से प्रतिदिन 1,96,777 किलो ग्राम प्रतिदिन दूध संकलन किया और 1,75,000 लीटर दूध का विपणन भी किया । तरल दूध के अलावा, दूध संघ ने मक्खन, घी, पनीर, श्रीखंड, दही एवं छाछ का उत्पादन एवं विपणन किया । संघ के पशु आहार संयंत्र ने 2349 मीट्रिक टन पशु आहार का भी उत्पादन किया । संघ ने वर्ष के दौरान रू. 3060 लाख का व्यापार किया ।   

वर्ष के दौरान विस्तार गतिविधियों को उचित महत्व प्राप्त हुआ । संघ ने 50,481 कृत्रिम गर्माधान, 1665 पशुओं का टीकाकरण एवं कृमी निवारण किया । संघ के दवारा आयोजित 611 प्रशिक्षण कार्यक्रमों से 9350 दुग्ध उत्पादकों ने लाभ उठाया । महिला डेरी सहकारी नेतृत्व कार्यक्रम के अंतर्गत 81 कार्यक्रमों का संचालन किया गया, जिसके फलस्वरूप 2805 महिलाओं को लाभ मिला एवं महिलाओं के 355 थ्रीफ्ट समूहों का गठन किया गया ।

पश्चिम असम दूध संघ

वर्ष 2014-15 के दौरान संघ ने 26100 किलोग्राम प्रतिदिन दूध संकलन किया और 32100 लीटर दूध का विपणन किया, जो पिछ्ले वर्ष से 11.24% अधिक है । मार्च  2015 तक संघ ने 10 दूध रूट में 150 दुग्ध उत्पादक संस्थाओं का गठन किया, एवं कुल सद्स्यता 4000 तक पहुंची । महिलाओं के दवारा डेरी में दिए गए योगदान एवं बधाई देने हेतु “पूर्बी दूध दिवस” का आयोजन किया गया । “पूर्बी” ब्रांड के तहत, तरल दूध की बिक्री में पिछले वर्ष के मुकाबले 12% का उछाल आया है । पनीर, मीठा दही, सादा दही, फ्लेवर्ड मिल्क, घी और लस्सी मे तेजी पायी गई । संघ के व्यापार में 21% से बढ़ोतरी हुई है जो वर्ष 2013-14 में रू. 5373 लाख से बढकर 2014-15 में रू. 6515 लाख तक पहुंचा है ।

वर्ष 2014-15 में राज्य सरकार ने विश्व बैंक द्वारा वित्‍त पोषित योजना एएसीपी—एएफ (आसाम एग्रीकल्चरल कम्प्टीटीवनेस प्रोजेक्ट-एडीशनल फाईनेंसिंग) का अनुमोदन करते हुए रू. 11.82 करोड़ की वार्षिक कार्य योजना संघ के लिए मंजूर की है, जिससे असम डेरी डेवेलेपमेंट प्लान का क्रियान्वयन किया जाएगा । नवम्बर 2014 में संघ को नगांव जिले में घर पहुंच एआई डिलीवरी योजना हेतु रू. 1.15 करोड़ की अंतरिम सहायता राशि प्राप्त हुई । पहले जिले में पशु धारकों के द्वारा सांडों से प्रजनन कराया जाता था, इसा प्रथा में अब बदलाव आया है एवं घर पहुंच ए.आई. डिलीवरी योजना का इसमें मुख्य योगदान रहा है । योजना के तहत वीर्य, गुजरात में स्थित “ए” श्रेणी के वीर्य केन्‍द्र एसएजी, बीड़ज से लिया जा रहा है ।

असम डेरी डेवेलेपमेंट प्लान के आरम्भ होने के बाद से नगांव जिले के 120 मोबाइल एआई टेक्निशियन की नियुक्ति की गई है एवं पूर्वी क्षेत्रीय प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण केन्द्र,सिलिगुडी में उनको प्रशिक्षण दिलवाया गया है । मार्च 2015 तक मोबाइल एआई टेक्निशियन के द्वारा 820 गांवों में 4500 एआई की जा चुकी है । लगभग 165 ग्रामीण जागरुक कैम्पों का भी आयोजन किया गया है, जिसके फलस्वरूप दुग्ध उत्पादकों को घर पर ही 50 रुपये का शुल्क अदा कर एआई सेवाओं का लाभ उठा रहें है । इसके अलावा परियोजना के साथ-साथ आयोजित बांझपन शिविरों के दवारा पशुओं के लिए उचित खुराक, समय पर कृमी निवारण, रोग के निदान और टीकाकरण कार्यक्रम से प्रसार करने में मदद की है ।

झारखंड राज्‍य सहकारी दुग्‍ध उत्‍पादक महासंघ लिमिटेड   

झारखंड में डेरी विकास के लिए प्रोत्साहन देने के लिए, राज्य सरकार ने जून 2013 में झारखंड राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक महासंघ (जेएमएफ) का गठन किया । देश में डेरी विकास के लिए निर्माता-स्वामित्व, पेशेवर प्रबंधन संस्थानों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करने में एनडीडीबी की भूमिका को देखते हुए, झारखंड सरकार ने नवगठित झारखंड मिल्क फेडरेशन को प्रबंधन पर लेने के लिए एनडीडीबी से अनुरोध किया । एनडीडीबी और झारखंड सरकार के बीच दूध महासंघ के संचालन हेतु 1 मार्च 2014 को एक समझौता ज्ञापन पर पांच साल की अवधि के लिए हस्ताक्षर किया गया ।

एनडीडीबी ने झारखंड में अपनी टीम तैनात की एवं झारखंड सरकार को वर्ष 2014-15 के लिए एक योजना  की प्रस्तुति दी, जिसे सरकार के द्वारा मंजूरी प्रदान की गई । 1 अगस्त 2014 से झारखंड मिल्क फ़ेडेरेशन ने ओरमांझी, कोडरमा और देवघर की डेरियों को लेते हुए दूध संकलन, प्रसंस्करण एवं विपणन की गतिविधियों को संभालना शुरु किया । इन तीनों डेरियों में दूध संकलन की मात्रा अगस्त 2014 में प्रतिदिन 12000 कि.ग्रा. से बढकर मार्च 2015 में प्रतिदिन 34000 कि.ग्रा. तक पहुंच चुकी है ।

इसके अलावा एनडीडीबी ने होटवार में 50 हजार लीटर प्रतिदिन की क्षमता के डेरी प्लांट के निर्माण कार्य को ट्र्न-की पर लिया है, जिसे 100 हजार लीटर प्रतिदिन की क्षमता तक बढाया जा सकता है । एनडीडीबी ने होटवार में प्रतिदिन 12 मीट्रिक की क्षमता के मिनरल मिक्स्चर प्लांट का निर्माण एवं कमिशनिंग कार्य किया है ।    

एनडीडीबी के दवारा चार वर्ष (2015-16 से 2018-19) के लिए एक व्यापक योजना तैयार की गई है, जो दूध उत्पादन क्षमता के सर्वेक्षण पर आधारित है, एवं झारखंड दूध महासंघ  द्वारा इसे प्रचलित किया जाएगा जिसका लक्ष्य 1 लाख लीटर प्रतिदिन का दूध उत्पादन और 1.60 लाख लीटर प्रतिदिन की तरल दूध बिक्री रखा गया है । व्यापक योजना का वित्तीय परिव्यय 179.78 करोड़ रुपए है। योजना को झारखंड सरकार के दवारा अनुमोदन दिया गया है ।