वीर्य उत्पादन

वीर्य उत्पादन

  • सन्1950 से, हमने एक लंबा सफर तय किया है और कई प्रजनन संबंधी तकनीकों के नियमित उपयोग से उल्‍लेखनीय परिणाम मिले हैं । हिमिकृत वीर्य के उपयोग से वीर्य केंद्रों पर उच्‍च आनुवंशिक गुणों वाले सांड़ों की पर्याप्‍त संख्‍या बनाए रखकर बेहतर लाभ प्राप्‍त किए जा रहे हैं तथा कृत्रिम गर्भाधान के लिए उच्‍च गुणवत्‍ता वाले वीर्य डोज़ उत्‍पादि किए जा रहे हैं । यहां सांड़ों के स्‍वास्‍थ्‍य का निरीक्षण, जैव विविधता, संसाधनों की प्रभावी उपयोगिता और अधिक उत्‍पादन बढ़ाने की बेहतर गुंजाइस है ।
  • पेशेवर ढंग से प्रबंधित एक वीर्य केंद्र है जो निर्धारित न्‍यूनतम मानक प्रोटोकाल (एमएसपी) से दृढ़ता से जुड़ा हुआ है तथा इसमें रोगमुक्‍त वीर्य उत्‍पादन के लिए पर्याप्‍त जैव-विविधता उपलब्‍ध है, किसी आनुवंशिक सुधार कार्यक्रम का मुख्‍य केंद्र होता है ।बेहतर प्रजनन तथा अधिक तीव्र आनुवंशिक प्रगति को सुनिश्चित करने के लिए यह रोगमुक्‍त अनुवांशिक गुणवत्‍ता युक्‍त हिमिकृत वीर्य का उत्‍पादन करता है । भारत सरकार की केंद्रीय निगरानी इकाई (सेंट्रल मॉनीटरिंग यूनिट) द्वारा इन्‍हें ‘ए’ या बी श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है ।
  • वर्तमान में भारत में 44 ए अथवा बी श्रेणियों में वर्गीकृत वीर्य केंद्र है जो देश में कृत्रिम गर्भाधान की आवश्‍यकताओं की पूर्ति हेतु लगभग 9.3 करोड़ (2014-15) हिमिकृत वीर्य डोजों (एफएसडी) का उत्‍पादन करते हैं । 2021-22 के अंत तक इन ए तथा बी श्रेणी के वीर्य केंद्रों द्वारा कुल मिलाकर लगभग 14 करोड़ हिमिकृत वीर्य डोजों (एफएसडी) के उत्‍पादन की योजना बनाई गई है ।
  • विभिन्‍न स्‍तरों पर निर्णय लेने को सरल बनाने के लिए एनडीडीबी पशुधन विकास बोर्डों/एजेंसियों, सरकारी पशुपालन विभागों, सहकारिताओं, एनजीओ, निजी एजेंसियों तथा ट्रस्‍टों से संबंधित वीर्य केंद्रों से वीर्य उत्‍पादन से संबंधित आंकड़ा एकत्र करती है, विश्‍लेषण करती है तथा उन्‍हें संबंधित वीर्य केन्‍द्रों के साथ सांझा करती है ।

1. साबरमती आश्रम गौशाला,बीडज

साबरमती आश्रम गौशाला (एसएजी) भारत का प्रमुख अनुसंधान केंद्र है, जो पशु उत्‍पादकता बढ़ाने के लिए उन्‍नत आनुवांशिक सुधार तथा प्रजनन संबंधी तकनीकों का प्रयोग करता है । इसकी स्‍थापना 1915 में महात्‍मा गांधी के द्वारा हुई थी, 1973 में एसएजी का प्रबंधन एनडीडीबी को सौंपा गया ।

1976 में संस्‍थापित एसएजी वीर्यकेंद्र आईएसओ 9001:2008 प्रमाणपत्र से सम्‍मानित भारत का सबसे बड़ा वीर्य उत्‍पादन केंद्र है तथा सीएमयू द्वाराउसके सभी मूलयांकन में इसे लगातार ए श्रेणी में रखा गया है । यह वर्षभर में 15 करोड़ से अधिक हिमिकृत वीर्य डोज़ों का उत्‍पादन करता है, और उसने भारत में सांड़ तथा वीर्य उत्‍पादन के सभी पहलूओं पर गुणवत्‍ता मानकों को स्‍थापित करने में सहयोग किया है ।

एसएजी की मुख्‍य गतिविधियां सांड़ उत्‍पादन, हिमिकृत वीर्य उत्‍पादन, नस्‍ल संरक्षण तथा चारा बीज उत्‍पादन है । यह केंद्र वीर्य उत्‍पादन के लिए गाय एवं भैंसों जैसे की गिर, कांकरेज, साहीवाल, रेड सिंधी, खिल्‍लार, शुद्ध होलस्टिन फ्रीजियन/जर्सी शुद्ध तथा संकर गाय नस्‍लों और मुर्रा, जाफराबादी, बन्‍नी, पंढ़रपुरी तथा महेसाणा भैंस नस्‍लों के विभिन्‍न जर्मप्‍लाज्‍म का प्रबंधन करता है । एसएजी में भ्रूण प्रत्‍यारोपण तथा इन-विट्रो निेषेचन (आईवीएफ) की उत्‍कृष्‍ट सुविधाएं उपलब्‍ध हैं तथा यह सांड़ उत्‍पादन के लिए भ्रूण प्रत्‍यारोपण तकनीक का प्रयोग करता है तथा नस्‍ल संरक्षण कार्यक्रमों का भी संपादन करता है ।

2. पशु प्रजनन केन्द्र, सालोन

एनडीडीबी ने 25 वर्षों पूर्व पशु प्रजनन केंद्र (एबीसी) की स्‍थापना इस उद्देश्‍य से की कि श्रेष्‍ठ जर्मप्‍लाज्‍म के प्रचार द्वारा देश में डेरी पशुओं की आनुवंशिक गुणवत्‍ता को बेहतर बनाया जाए । अब यह देश में पशु प्रजनन तथा गुणवत्‍ता युक्‍त वीर्य के उत्‍पादन में उत्‍कृष्‍टता का एक केंद्र है । एबीसी भारत का तीसरा सबसे बड़ा वीर्य उत्‍पादक केंद्र है ।

इसका मुख्‍य कार्य सांड़ तथा वीर्य उत्‍पादन है, यह हिमिकृत वीर्य तथा प्रजनक सांड़ों के रूप में उच्‍च गुणवत्‍ता वाली आनुवंशिकी मुहैया कराता हे । इस केंद्र में साहीवाल, रेड सिंधी, राठी, थारपारकर, हरियाना शुद्ध होलस्टिन फ्रीजियन/जर्सी शुद्ध तथा संकर गाय नस्‍लों और मुर्रा एवं भदावरी भैंस नस्‍लों के श्रेष्‍ठ सांड़ उपलब्‍ध हैं ।

3. रोहतक वीर्य केन्द्र

हरियाणा डेरी विकास सहकारी महासंघ लि. (एचडीडीसीएफ) ने 1 सितंबर 2009 को रोहतक वीर्य केंद्र के प्रबंधन का दायित्‍व राष्‍ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) को सौंपा जो पहले वीर्य बैंक एवं प्रशिक्षण केंद्र (एसबीटीसी) के नाम से जाना जाता था ।

रोहतक वीर्य केंद्र का सुदृढ़ीकरण:

बुल शेड, वीर्य संकलन क्षेत्र, वीर्य प्रोसेसिंग प्रयोगशाला, कार्यालय भवन तथा अन्‍य सहायक सिविल संरचनाओं के नवीकरण द्वारा भविष्‍य की आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए रोहतक वीर्य केंद्र का सुदृढ़ीकरण किया गया है । वर्तमान वीर्य संकलन प्रयोगशाला आधुनिक उपकरण जो नवीन वीर्य प्रोसेसिंग तकनीकी से युक्‍त हैं, से सुसज्जित है । एक गुणवत्‍ता नियंत्रक प्रयोगशाला की भी स्‍थापना की गई है तथा यह सभी आवश्‍यक बुनियादी ढ़ांचों से सुसज्जित है ।
हिमितकृत वीर्य डोज़ों का उत्‍पादन दिसंबर, 2011 में शुरू हुआ । 2013-14  में 32 सांड़ों से 5.37 लाख हिमिकृत वीर्य डोजों की प्राप्ति हुई । कृषि संबंधी कार्यों का भी सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है । 2012-13 में भारत सरकार के सीएमयू मूल्‍यांकन में इस वीर्य केंद्र को ए श्रेणी का दर्जा मिला ।